Heart Aches

मेरा इश्क़ – मेरा पहला इश्क़ ।

मेरा पहला इश्क़, इश्क़ था भी या नहीं मैं नहीं जानती ।

मेरे लिए वो सब कुछ था 

वो लम्हा ही सब कुछ था , वो पल ही सब कुछ था ।

उसके लिए इश्क़ था या नहीं , मैं नहीं जानती ।

मेरी राहों पे चलता था , मेरे रंगों में बहता था 

पर इश्क़ था या नहीं , मैं नहीं जानती ।

मेरे साथ रहता था , उसके साथ में मैं रहती थी 

पर वो इश्क़ था या नहीं , मैं नहीं जानती ।

ना जान पायी हूँ अब तक , ना जान पायी थी तब 

जब वो मुझे छूता था , वो मेरे लिए इश्क़ था या नहीं मैं नहीं जानती ।

दुनिया कहती रही मैं पागल, दुनिया कहती रही मैं जाहिल 

पर वो मेरे लिए इश्क़ था , यह मैं जानती थी ।

मेरी आँखो को पढ़ता था या नहीं , पता नहीं 

लेकिन उसकी आँखो में दिखता था , वो इश्क़ नहीं तो क्या था ।

मेरी चाहतों में उसका नाम था , मेरी दुआएँ उसकी ग़ुलाम 

मेरे लब उसकी जायदाद , पर वो मेरा इश्क़ था ।

मैंने कभी नहीं जाना , की वो क्यूँ गया कहाँ गया 

पर आज जो मेरे पास है , उसकी यादें , वो मेरे इश्क़ हैं ।

मेरी दुनिया में वो आज भी है 

मेरे सपनो में वो आज भी है 

दिन ढल गए, रातें गुजर गयी 

लेकिन जो राह गया , वो इश्क़ है या नहीं , मैं नहीं जान पायी ।

उसका एहसास , है मेरे पास 

उसका एहसान , है मेरे नाम 

लेकिन वो एहसान था या इश्क़,मैं नहीं जानती ।

9 thoughts on “मेरा इश्क़ – मेरा पहला इश्क़ ।

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